Dow Jones और NASDAQ क्या है? | Dow Jones NASDAQ Kya Hai

Dow Jones NASDAQ Kya Hai: जिस तरह भारत में शेयर बाजार को नापने के लिए निफ्टी (NIFTY) और सेंसेक्स (SENSEX) का उपयोग किया जाता है, उसी तरह अमेरिका में Dow Jones और NASDAQ दो प्रमुख शेयर बाजार इंडेक्स हैं। ये दोनों इंडेक्स सिर्फ अमेरिकी बाजार ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के शेयर बाजारों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।

जब अमेरिका के बाजारों में तेजी या मंदी आती है, तो इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिलता है। Dow Jones उन कंपनियों का सूचकांक है जो अमेरिका की सबसे बड़ी और स्थापित कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि NASDAQ मुख्य रूप से टेक्नोलॉजी आधारित कंपनियों पर केंद्रित है।

अगर इन इंडेक्स में गिरावट आती है, तो निवेशकों की धारणा कमजोर होती है, जिससे भारतीय बाजार में भी गिरावट देखी जा सकती है। इसलिए, आज हम विस्तार से समझेंगे कि Dow Jones और NASDAQ क्या हैं और ये हमारे शेयर बाजार को कैसे प्रभावित करते हैं। चलिए पहले Dow Jones के बारे में विस्तार से समझते हैं, फिर NASDAQ से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियों पर नजर डालते हैं।

Dow Jones और NASDAQ क्या है? | Dow Jones NASDAQ Kya Hai

Dow Jones क्या हैं?

Dow Jones का पूरा नाम Dow Jones Industrial Average (DJIA), जिसे Dow या Dow 30 भी कहा जाता है, अमेरिका का एक प्रमुख स्टॉक मार्केट इंडेक्स है। यह 30 बड़ी और प्रसिद्ध कंपनियों के शेयरों के प्रदर्शन को दर्शाता है। इसे 1896 में बनाया गया था और यह अमेरिका के शेयर बाजार का सबसे पुराना मापक है।

DJIA को शेयर बाजार की स्थिति समझने के लिए सबसे ज्यादा देखा जाता है। इसमें शामिल कंपनियां अलग-अलग सेक्टर्स से आती हैं, और इसका मूल्य इन 30 कंपनियों के शेयरों की औसत कीमत के आधार पर तय होता है।

जब Dow Jones बढ़ता है, तो इसका मतलब है कि बाजार मजबूत है, और जब गिरता है, तो आर्थिक कमजोरी का संकेत देता है। Dow Jones में Apple, Coca-Cola, McDonald’s और Microsoft जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।

Dow Jones Futures क्या हैं?

Dow Jones Futures एक तरह के शेयर बाजार अनुबंध (contracts) होते हैं, जो निवेशकों को यह अनुमान लगाने का मौका देते हैं कि भविष्य में Dow Jones इंडेक्स या इसकी कंपनियों के शेयरों का मूल्य क्या होगा। इससे निवेशक बाजार की दिशा (उतार-चढ़ाव) को समझ सकते हैं और अपने निवेश को सुरक्षित (hedge) या अधिक मुनाफा कमाने (speculate) की कोशिश कर सकते हैं।

इन फ्यूचर्स की कीमत उन मौजूदा अनुबंधों (contracts) पर आधारित होती है, जिन्हें पहले से तय की गई कीमतों और तारीखों के हिसाब से खरीदा या बेचा जाता है। यह अनुबंध बाजार के भविष्य के रुझान को समझने में मदद करते हैं। Dow Jones Futures को देखकर निवेशक यह अंदाजा लगा सकते हैं कि अगले कुछ दिनों या हफ्तों में शेयर बाजार किस दिशा में जा सकता है।

Dow Jones कब खुलता और बंद होता है?

Dow Jones का बाजार उसी समय खुलता है, जिस समय अमेरिका के अन्य प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज (Stock Exchange) काम करते हैं। यह सोमवार से शुक्रवार तक खुला रहता है।

भारतीय समय (IST) के अनुसार, Dow Jones बाजार रात 7:00 बजे खुलता है और तड़के 1:30 बजे बंद होता है। यह केवल मार्केट हॉलिडे (बाजार की छुट्टियों) के दिन बंद रहता है।

भारतीय बाजार पर डॉव जोन्स का प्रभाव

Dow Jones का भारतीय शेयर बाजार पर क्या असर पड़ता है, इसे समझने से पहले हमें कोरिलेशन (Correlation) का मतलब जानना जरूरी है। कोरिलेशन एक वित्तीय संकेतक है, जो यह बताता है कि दो बाजार या कारक आपस में कितने जुड़े हुए हैं और एक के बदलने से दूसरे में क्या असर होगा।

पिछले 10 वर्षों में, Sensex ने औसतन 9.70% और Dow Jones ने 9.75% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की है। कई बार भारतीय बाजार Dow Jones से जुड़े हुए नजर आए हैं। उदाहरण के लिए, 2008 में Lehman Brothers बैंक के दिवालिया होने से अमेरिकी बाजारों में भारी गिरावट आई।

इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा, क्योंकि विदेशी निवेशकों (FIIs) ने अपना पैसा निकाल लिया, जिससे Sensex में बड़ी गिरावट आई और बाजार में नकदी (Liquidity) की कमी हो गई।

Dow Jones और भारतीय शेयर बाजार

1. निवेशकों की भावना (Investor Sentiment)
Dow Jones को दुनिया भर के निवेशकों की भावना का प्रमुख संकेतक माना जाता है। जब Dow Jones गिरता है, तो भारतीय निवेशक भी घबरा जाते हैं और शेयर बेचने लगते हैं, जिससे भारतीय बाजार में गिरावट आ जाती है।

2. विदेशी निवेशक (FIIs – Foreign Institutional Investors)
भारत के शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों (FIIs) की बड़ी भूमिका होती है। जब Dow Jones अच्छा प्रदर्शन करता है, तो विदेशी निवेशक भारत में अधिक पैसा लगाते हैं, जिससे शेयरों की कीमतें बढ़ती हैं। लेकिन जब Dow Jones गिरता है, तो FIIs भारत से पैसा निकाल लेते हैं, जिससे बाजार नीचे चला जाता है।

3. भारत और अमेरिका के आर्थिक संबंध
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, निवेश और सेवाओं का गहरा संबंध है। कई भारतीय कंपनियों का कारोबार अमेरिका में है, और कई अमेरिकी कंपनियों के ग्राहक भारत में हैं। यदि Dow Jones गिरता है, तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है, जिससे भारतीय कंपनियों पर भी असर पड़ता है।

Dow Jones का भारतीय बाजार पर प्रभाव कब पड़ा था?

2008 आर्थिक संकट:
Dow Jones 14,000 से 6,500 अंक तक गिरा, जिससे Sensex 1,408 अंक टूटकर 9,716 पर आ गया।

COVID-19 (2020):
Dow Jones 4 दिनों में 6,400 अंक गिरा, जिससे Sensex 3,935 अंकों की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

NASDAQ क्या हैं?

Nasdaq (नेशनल एसोसिएशन ऑफ सिक्योरिटीज़ डीलर्स ऑटोमेटेड कोटेशन) दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है, जो न्यूयॉर्क में स्थित है। इसका ट्रेडिंग सिस्टम पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक है, जिससे यह तेज़ और आधुनिक बना है।

Nasdaq पर अधिकतर टेक्नोलॉजी कंपनियां लिस्टेड होती हैं, जैसे Apple, Microsoft, Amazon, Tesla, Meta (Facebook), और Starbucks। इस एक्सचेंज पर स्टॉक्स ज्यादा अस्थिर (volatile) होते हैं, यानी इनके दाम तेजी से ऊपर-नीचे हो सकते हैं, जिससे निवेशकों को ज्यादा मुनाफे के मौके मिलते हैं।

Nasdaq को उन कंपनियों के लिए जाना जाता है जो नवाचार (Innovation) और तेज़ी से बढ़ने पर ध्यान देती हैं। इसमें हाई-टेक कंपनियों के साथ अन्य उद्योगों की कंपनियां भी शामिल हैं।

NASDAQ Composite क्या हैं?

जब निवेशक यह जानना चाहते हैं कि टेक्नोलॉजी कंपनियों के स्टॉक्स कैसा प्रदर्शन कर रहे हैं, तो वे NASDAQ Composite Index को देखते हैं। यह इंडेक्स NASDAQ स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड सभी कंपनियों के प्रदर्शन को ट्रैक करता है और इसे IXIC प्रतीक से दिखाया जाता है।

अन्य प्रमुख इंडेक्स जैसे S&P 500 और Dow Jones की तरह, NASDAQ Composite भी एक महत्वपूर्ण इंडेक्स माना जाता है क्योंकि यह बाजार के बड़े आर्थिक रुझानों को दर्शाता है।

  • S&P 500 बड़े और स्थिर स्टॉक्स को दिखाता है।
  • Dow Jones पुरानी और डिविडेंड देने वाली कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है।
  • NASDAQ Composite मुख्य रूप से टेक्नोलॉजी कंपनियों पर केंद्रित है।

NASDAQ Impact On Indian Market

जब NASDAQ में गिरावट होती है, तो इसका असर भारतीय IT कंपनियों पर भी देखा जाता है। यह अक्सर तर्कहीन होता है क्योंकि भारतीय IT कंपनियां अमेरिकी ब्याज दरों में वृद्धि से लाभ कमाती हैं। जैसे ही अमेरिकी ब्याज दरें बढ़ती हैं, रुपया (INR) अक्सर गिरता है, जिससे भारतीय IT कंपनियों की कमाई और लाभ बढ़ते हैं।

हालांकि मंदी या आर्थिक गिरावट से BigTech कंपनियों पर अस्थायी असर पड़ता है, लेकिन यह स्थायी नहीं होता। मंदी में कंपनियां आईटी और मैनपावर लागत कम करने के लिए आउटसोर्सिंग बढ़ाती हैं। COVID-19 के दौरान भी कंपनियों ने भारतीय IT सेवाओं का अधिक उपयोग किया था।

NASDAQ की बड़ी टेक कंपनियां भारतीय IT कंपनियों के साथ क्लाउड और डिजिटल सेवाओं में साझेदारी करती हैं। क्लाउड सेवाओं की वृद्धि दर 20% से अधिक बनी रहेगी, जिससे भारतीय IT कंपनियां 14%-15% की औसत वृद्धि दर्ज कर सकती हैं।

निष्कर्ष

Dow Jones और NASDAQ दोनों ही अमेरिकी शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स हैं। Dow Jones पारंपरिक और स्थिर कंपनियों को दर्शाता है, जबकि NASDAQ मुख्य रूप से टेक और ग्रोथ कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है। इनका प्रदर्शन न केवल अमेरिकी बल्कि भारतीय शेयर बाजार पर भी प्रभाव डालता है। विदेशी निवेशक (FIIs) और भारतीय IT कंपनियां इनसे जुड़े रुझानों पर निर्भर रहती हैं। इसलिए, वैश्विक बाजार में निवेश के फैसलों के लिए इन इंडेक्स को समझना जरूरी है।

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